नए उत्तर
क्या पीप नजिस (अशुद्ध) हैॽ
सहेजेंक्या “अन-नूर” (प्रकाश) अल्लाह के उत्तम नामों में से एक हैॽ
सहेजेंनमाज़ के अर्कान, वाजिबात और सुन्नतें क्या हैंॽ
नमाज़ के अर्कान चौदह (14) और उसके वाजिबात आठ (8) हैं। जबकि नमाज़ की सुन्नतें बहुत-सी है, जिनमें से कुछ का संबंध कथन से है और कुछ का संबंध कार्य से। रुक्न और वाजिब के बीच अंतर यह है कि रुक्न जानबूझकर या गलती से छोड़ देने से माफ नहीं होता है, बल्कि उसको करना ज़रूरी होता है। जहाँ तक वाजिब का संबंध है, तो वह भूलकर छोड़ने से माफ हो जाता है और सह्व का सजदा करके उसकी भरपाई की जाती है।सहेजेंअनाज और फलों की ज़कात तथा उनके निसाब की मात्रा
सहेजेंइस्लाम में आत्म-प्रशिक्षण
इस्लाम में आत्म-प्रशिक्षण ( या आत्म-सुधार) के कुछ साधन ये हैं : 1. अल्लाह की इबादत करना, उसके साथ संपर्क बनाए रखना और उसके प्रति समर्पित होना। 2. क़ुरआन की अधिक से अधिक तिलावत करना, उसके अर्थ पर चिंतन करना और उसके गहरे रहस्यों पर विचार करना। 3. धार्मिक उपदेश वाली लाभकारी किताबें पढ़ना। 4. शैक्षिक कार्यक्रमों में शामिल होना, जैसे कि धार्मिक पाठ और व्याख्यान 5. अपने समय की रक्षा करना और उसका उपयोग उन कार्यों में करना जिनसे व्यक्ति को इस दुनिया और परलोक—दोनों में लाभ हो। 6. जायज़ सुख-सुविधाओं में अत्यधिक लिप्त होने से बचना और उन पर अनावश्यक ध्यान देने से परहेज़ करना। 7. नेक संगत अपनाना और सदाचारी दोस्तों को खोजना। 8. ज्ञान को अमल में लाना, जो कुछ सीखा है उसे व्यावहारिक रूप से लागू करना। 9. अपना कठोर और सटीक आत्म-मूल्यांकन करना (अपना मुहासबा करना)। 10. सर्वशक्तिमान अल्लाह पर भरोसा रखने के साथ, आत्मविश्वास बनाए रखना। 11. अल्लाह सर्वशक्तिमान की खातिर अपने नफ़्स से अप्रसन्न होना और उसे तुच्छ समझना; यह पिछले बिंदु के विपरीत नहीं है, क्योंकि व्यक्ति को नेक कर्म करते रहना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी समझना चाहिए कि उसके भीतर अभी भी कमियाँ और कोताहियाँ मौजूद हैं। 12. "शरई एकांतता" अपनाना : अर्थात् मनुष्य हर समय लोगों के साथ घुला-मिला न रहे और न ही अपना सारा समय सामाजिक मेलजोल में बिताए, बल्कि वह अपने लिए कुछ ऐसे विशेष समय निर्धारित करे जिन्हें वह अल्लाह की इबादत और शरई तौर पर वैध एकांत (ख़लवत) के लिए समर्पित करे।सहेजें
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